RNA को बाहरी गोलियों (एक्सोसोम) में परिवहन करने की प्रणाली

एक्सोसोम(EV)

माइक्रोआरएन (miRNA) एक छोटा गैर सोडिंग RNA है जो जीन के पोस्ट ट्रांसक्रिप्शन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। miRNA का कई जीवन प्रक्रियाओं और रोगों पर प्रभाव पड़ता है, जैसे कि कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोडिजेनरेटिव रोग आदि। miRNA को कोशिकाओं में मौजूद होता है, लेकिन इनको एक्सोसोम्स या माइक्रोवेसिकल्स (Microvesicles) जैसे कोशिका-बाह्य रूपों (EVs) में पैकेज किया जाता है और इन्हें सेल से बाहरी स्थानों में भी पाया जाता है।

miRNA कोशिका-बाह्य रूपों में सॉर्ट (चुनाव) किया जाता है जो कि सक्रिय प्रक्रिया होती है, इसकी विधि अभी पूरी तरह से समझ में नहीं आई है। हालांकि, miRNA को एवी में कैसे सॉर्ट किया जाता है, इसके कुछ मेकेनिज़्म का प्रस्तावित किया गया है।

 

श्रृंगारयुक्त मोटीफ पर आधारित सॉर्ट:

अध्ययन द्वारा दिखाया गया है कि miRNA में विशेष श्रृंगारयुक्त मोटीफ होने पर, उन्हें एवी के पैकेजिंग को प्रेरित करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, miRNA के ‘EXOmotifs’ और ‘GGAG’ मोटीफ के मौजूद होने का एक संबंध एक्सोसोम सॉर्टिंग के साथ देखा गया है।

miRNA-Induced Silencing Complex (miRISC) पर आधारित सॉर्ट:

miRISC से संबंधित miRNA, जो जीन नीचे लाने के लिए साइलेंसिंग का प्रेरित करता है, विशेष रूप से एवी में सॉर्ट किया जा सकता है। एक इस कॉम्प्लेक्स के हिस्सा होने वाला प्रोटीन AGO2 एवी में पाया जाता है।

miRNA-Induced Silencing Complex (miRISC) एक सेल के भीतर जीन नियंत्रण के लिए एक मेकेनिज़्म है। इस कॉम्प्लेक्स में miRNA से मिलकर लक्षित mRNA को प्रेरित करने वाले प्रोटीन जैसे आर्गोनॉट (AGO) शामिल होते हैं।

miRISC से संबंधित miRNA की EV में सेलेक्टिव सॉर्टिंग के मेकेनिज़्म के बारे में अभी भी बहुत कुछ नहीं ज्ञात है। हालांकि, एवी में miRISC के घटक तंत्रों जैसे AGO प्रोटीन की मौजूदगी की सूचना मिलती है। यह सूचित करता है कि इन प्रोटीनों से बांधी गई miRNA एवी में समेटी जा सकती है।

इस प्रकार की प्रक्रिया कैसे होती है, मानवीय स्तर पर मानकीकरण अभी भी जारी है। AGO2 जैसे miRISC के घटक प्रोटीन का एवी में मौजूद होना उसकी भूमिका का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, miRISC और miRNA के बांधने का सेल और सेल बाह्य पर्यावरण के बीच वितरण पर भी कुछ सबूत है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए और अधिक प्रमाणिती की जरूरत है।

Gibbings, D. J., Ciaudo, C., Erhardt, M., & Voinnet, O. (2009). Multivesicular bodies associate with components of miRNA effector complexes and modulate miRNA activity. Nature cell biology, 11(9), 1143-1149.

कृपया ध्यान दें कि miRNA और EV जीवविज्ञान के क्षेत्र में बड़ी गति से विकसित हो रहे हैं, इसलिए संभावतः सितंबर 2021 में मेरे ज्ञान सीमा से परे इन मेकेनिज़्मों पर अधिक नवीन अध्ययन और सूचनाएं उपलब्ध हो सकती हैं।

एचएनआरएनपीसी (hnRNPs) पर आधारित सॉर्ट:

hnRNPs अंग्रेजी में “Heterogeneous Nuclear Ribonucleoproteins” को छोटे रूप में कहा जाता है।

ये विभिन्न आरएनए प्रक्रियाओं, विशेष रूप से स्प्लाइसिंग, आरएनए के परिवहन, एमआरएनए की स्थिरता, और अनुवाद को नियंत्रित करने का समर्थन करते हैं।

hnRNPs सामान्यतः कोशिका के नाभिकीय स्थानों में मौजूद होते हैं, लेकिन वे सेल सामान्यतः भीतरी रूप से जाने में सक्षम होते हैं। इनका कार्य मुख्य रूप से आरएनए के साथ अंतर्क्रिया करके नियंत्रित होता है। hnRNPs को विशेष आरएनए मोटीफों को मान्यता देने और इसके माध्यम से निर्दिष्ट आरएनए मोलेक्यूल को निर्दिष्ट कोशिका-आंतरिक स्थानों तक भेजने की क्षमता होती है।

miRNA के सॉर्टिंग के संबंध में, सोचा जाता है कि hnRNPs miRNA के साथ बांधकर उन्हें कोशिका-बाह्य रूपों (EVs) में भेजने में सहायता करते हैं। विशेष रूप से, hnRNPA2B1 नामक प्रोटीन का सोमोय्लेशन (पोस्ट-ट्रांसलेशनल मॉडिफिकेशन) कराया जाता है, जो निर्दिष्ट miRNA मोटीफों को मान्यता देता है और उन्हें EVs में सॉर्ट करने की सुझावित करता है।

हालांकि, hnRNPs और miRNA के सॉर्टिंग के संबंध में अभी पूरी तरह से समझाने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

 

संदर्भ: Santangelo, L., Giurato, G., Cicchini, C., Montaldo, C., Mancone, C., Tarallo, R., … & Weisz, A. (2016). The RNA-Binding Protein SYNCRIP Is a Component of the Hepatocyte Exosomal Machinery Controlling MicroRNA Sorting. Cell reports, 17(3), 799-808.

समोइलेटेड-एचएनआरएनपीए2बी1 पर आधारित सॉर्ट:

समोइलेशन (पोस्ट-ट्रांसलेशनल मॉडिफिकेशन) के बाद hnRNPA2B1 प्रोटीन भी miRNA के सॉर्टिंग में शामिल हो सकता है। समोइलेटेड hnRNPA2B1 मान्यता देता है और उन्हें EVs में सॉर्ट करने के लिए निर्दिष्ट miRNA मोटीफों को मान्यता देता है।

समोइलेशन संदर्भीकरण (छोटे यूबिक्विटिन-जैसे मॉडिफायर) प्रोटीन के साथ जुड़ने पर एक रासायनिक परिवर्तन है जो प्रोटीन के विभिन्न कार्यों पर प्रभाव डालता है।

यहां दिए गए बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. प्रोटीन की सक्रियता या निष्क्रियता: SUMO किसी प्रोटीन के साथ जुड़ने पर, उस प्रोटीन की सक्रियता को बढ़ावा देने या निष्क्रिय करने की क्षमता होती है। यह एंजाइम, ट्रांस्क्रिप्शन फैक्टर आदि जैसे विभिन्न प्रोटीनों के लिए लागू होता है।
  2. प्रोटीन की स्थानिकता: समोयलेशन प्रोटीन की स्थानिकता में परिवर्तन कर सकती है। उदाहरण के लिए, SUMO के जुड़े हुए प्रोटीन आमतौर पर सेल नाबिकीय क्षेत्रों में स्थानांतरित होने की प्रावधानिकता रखते हैं।
  3. प्रोटीनों के बीच आपसी प्रभाव: SUMO किसी प्रोटीन के साथ जुड़ने पर, वह प्रोटीन किसी अन्य प्रोटीन के साथ कैसे आपसी प्रभावित होता है, उसे परिवर्तित कर सकता है। यह प्रोटीन को नए साथी के साथ बांधने की क्षमता प्राप्त करने या मौजूदा साथी से बांधने की क्षमता खोने के माध्यम से होता है।
  4. प्रोटीन की स्थिरता: समोयलेशन प्रोटीन की स्थिरता पर प्रभाव डाल सकती है और उसकी उम्र को बढ़ाने या कम करने की क्षमता होती है।

इस तरह के प्रभाव के माध्यम से, समोयलेशन जैविक प्रक्रियाओं जैसे सेल विभाजन, डीएनए रिपेयर, ट्रांस्क्रिप्शन नियंत्रण, प्रोग्रामबद्ध कोशिका मृत्यु आदि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संदर्भ: Villarroya-Beltri, C., Gutiérrez-Vázquez, C., Sánchez-Cabo, F., Pérez-Hernández, D., Vázquez, J., Martin-Cofreces, N., … & Falcón-Pérez, J. M. (2013). Sumoylated hnRNPA2B1 controls the sorting of miRNAs into exosomes through binding to specific motifs. Nature communications, 4(1), 1-10.

4E-T पर आधारित सॉर्ट:

4E-T (EIF4E transporter) एक RNA बाइंडिंग प्रोटीन है जो ट्रांस्क्रिप्शन के बाद RNA के मेटाबोलिज़्म और ट्रांसलेशन को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।

EIF4E का पूरा नाम “Eukaryotic Translation Initiation Factor 4E” है, जो प्रोटीन की ट्रांसलेशन (जीनेटिक जानकारी को प्रोटीन में रूपांतरित करने की प्रक्रिया) शुरू करने की क्षमता रखता है। वहीं, 4E-T उस EIF4E को ट्रांसपोर्ट करने में संलग्न होता है और ट्रांसलेशन के नियंत्रण में सहायता करता है।

विशेष रूप से, 4E-T EIF4E के साथ जुड़कर उसे चेपरोन बनाता है। इससे, EIF4E को सही स्थान पर सटीकता से ले जाने और उसकी कार्यप्रणाली को सही समय पर समारोहित करने की क्षमता प्राप्त होती है।

इसके अलावा, 4E-T में mRNA के चयनित ट्रांसलेशन को नियंत्रित करने की क्षमता भी होती है। विशेष रूप से, सेल स्ट्रेस के तहत, 4E-T विशेष स्ट्रेस प्रतिक्रिया प्रोटीनों के mRNA के ट्रांसलेशन को नियंत्रित करता है।

इसके अलावा, हाल ही में किए गए अध्ययनों में दिखाया गया है कि 4E-T miRNA को एक्सोसोम्स (एक प्रकार के सेलुलर एक्सोज़ोम्स) में सॉर्ट करने की क्षमता रखता है। इससे सेल निर्धारित कर सकती है कि कौन से miRNA को एक्सोसोम्स में शामिल करें।

संदर्भ: Kouhkan, F., Hafizi, M., Mobarra, N., Mossahebi-Mohammadi, M., Mohammadi, S., Behmanesh, M., … & Sattari, M. (2015). miRNAs: a new method for erythroid differentiation of hematopoietic stem cells without the presence of growth factors. Applied biochemistry and biotechnology, 175(2), 1134-1148.

 

चेपरोन * क्या है?
चेपरोन (chaperone) एक प्रकार का प्रोटीन है जो प्रोटीन को सही त्रिमात्रिक ढ़ांचा (यानी, सही रूप में फोल्ड हुआ हालत) में लाने में मदद करने की क्षमता रखता है। यदि प्रोटीन सही रूप में फोल्ड नहीं होता है, तो उसकी कार्यप्रणाली क्षमता प्रभावित हो सकती है और सेल पर तनाव पड़ सकता है।

चेपरोन प्रोटीन नव-संयुक्त प्रोटीन को सही ढ़ांचा बनाने के साथ ही, अनुचित आकृति वाले प्रोटीन को सही ढ़ांचा में मरम्मत करने और मरम्मत नहीं हो सकने वाले प्रोटीन को टूटने से बचाने में मदद करता है। इससे सेल प्रोटीन की गुणवत्ता को सुरक्षित रख सकती है।

इसके साथ ही, चेपरोन प्रोटीनों को ले जाने में भी संलग्न होता है। यानी, चेपरोन प्रोटीन प्रोटीन को “निर्देशित” करने की क्षमता रखता है और उसे सही स्थान तक पहुंचाने में सुनिश्चित करता है।

संदर्भ: Hartl, F. U., Bracher, A., & Hayer-Hartl, M. (2011). Molecular chaperones in protein folding and proteostasis. Nature, 475(7356), 324-332.

 

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